जिंदगी
जिंदगी जिंदगी किस मोड़ पर है ले आई, सौदे नये है, शर्तै पुरानी। हौसले बुलंद और उड़ाने ऊंची है भरनी, पंख वो ही है, कटे आधे अधूरे। अब जाकर जागे है हम गहरी नींद से, कारवाँ मिलों आगे है निकल चूका। सबको साथ लेते लेते कब हाथ छुट गये, हम अकेले थे कल, अकेले आज भी है। हर बार परतें चढाकर रिश्ते निभाएं , परतों पर से खपलीयाँ है निकलने लगी। जोड तोड की है, टांके लगाएं है, गाँठे और सीयन भी है दिखने लगी। हर हाल में जीना है, बस जीना है, "निरर्थक" शब्द समझ में आने लगा है।
Wah bahut khub🌹🌹
ReplyDeleteWaah very nice 👌👌🌹🌹
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