जिंदगी

जिंदगी

जिंदगी किस मोड़ पर है ले आई,
सौदे नये है, शर्तै पुरानी।
हौसले बुलंद और उड़ाने ऊंची है भरनी,
पंख वो ही है, कटे आधे अधूरे।
अब जाकर जागे है हम गहरी नींद से,
कारवाँ मिलों आगे है निकल चूका।
सबको साथ लेते लेते कब हाथ छुट गये,
हम अकेले थे कल, अकेले आज भी है।
हर बार परतें चढाकर रिश्ते निभाएं ,
परतों पर से खपलीयाँ है निकलने लगी।
जोड तोड की है, टांके लगाएं है,
गाँठे और सीयन भी है दिखने लगी।
हर हाल में जीना है, बस जीना है,
"निरर्थक" शब्द समझ में आने लगा है।

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महकना है जिंदगी तु चाहे जितने इम्तिहान ले लेना,दर्द लाखों मेरे दिल में भर देना ,हात किसी ने ऐसे थामा है,डगमगाते तो है ये कदम मेरे, एतबार है कि संभालनेवाला है। उडने की कोशिश में हजार बार गिरी हूँ,जख्म न जाने कितने मिले है,दर्द कितना ही सहा है, कल की उम्मीद में आज जीया है, उसी का सिला है, कोई हमदर्द मिला है।अब जो मिला है अनमोल है, नसीब को नसीब से जोड़ना है, इतनी शिद्दत से चाहा है कि सब खत्म, न कुछ बचा अब किसी ओर के लिए महकना है खुशबू बनकर हवाँओं में..... अनामिका (शारदा पवार कापूरे)

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